आदि शक्ति माँ जगदम्बे
आदि शक्ति माँ जगदम्बे तूने कैसी ये लीला रचाई।
कहीं पे दुर्गा कहीं लक्ष्मी कहीं पे काली माई।
भक्तों कल्याण हेतु माँ रूप अनेको धारे।
बांह पकड़ कर निज भक्तों को भव से पर उतारे।
भक्तों की चिंता हरने को चिन्तपुरनी बनिआई।
कहीं पे दुर्गा कहीं लक्ष्मी कहीं पे काली माई।
ऋषि मुनी भक्तों पे तेरे जब अत्याचार हुये।
रणचण्डी बनकर माँ कूदी असुरों का संहार किये।
चण्ड मुण्ड महिषासुर मारे चामुण्डा बन आई।
कहीं पे दुर्गा कहीं लक्ष्मी कहीं पे काली माई।
जिसने तेरा नाम लिया माँ उसका ही कल्याण हुआ।
कली के कलुष मिटाने को माँ वैष्णव बनकर आई।
कहीं पे दुर्गा कहीं लक्ष्मी कहीं पे काली माई।
चरण शरण जिसने ली माँ की उसको गोद उठाया।
भव भय से निर्भय कर माता परम धाम पहुँचाया।
कृपा हुई माँ जगदम्बे की संसृति क्लेश मिटाई।
कहीं पे दुर्गा कहीं लक्ष्मी कहीं पे काली माई।

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