Friday, 2 December 2016

करती क्यों न मातु दया मुझ पर। 


यदि नाम दयामयी है तेरा करती क्यों न मातु दया मुझ पर। 
किस तरह पर होगी मैया जीवन की नैया बिच भवँर। 
नहि पूजा स्तुति मंत्र जंत्र नही आवाहन साधन कोई। 
सकलत्रि हरे माँ सिद्धि करे अब कृपा दृष्टि  कर  दे मुझ पर। 
तेरे चरण कमल की सेवा में विधिवत तत्पर में रह न सका। 
माँ ममतामयी क्षमा कर  दे बालक अबोध तेरा किंकर। 
में दिन हिन् नट क्षीन मलिन मति पापी महा पातकी हूँ। 
जय उमा रमा ब्राहाणी  माँ त्रय देवी  आकर। 
मंगला भद्र काली माता हे अरुण नयन खप्पर वाली। 
भूतार्ति हारिणी कालजयी रक्षा कर माँ मेरी आकर। 
निर्भय कारिणी भव भय हारिणी हे मातु वैष्णवी  दया करो। 
सद ज्ञान प्रदान करे माता भक्ती का भव भरे अन्दर।

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