नवदुर्गे माँ तुझे प्रणाम।
नौ नौ स्वरूप नव कीर्तिमान नवदुर्गे माँ तुझे प्रणाम।है दिव्य अनूप रूप सुंदर शक्तियां तुम्हें मेरा प्रणाम।
माँ प्रथम शैलपुत्री दिव्तीय माँ ब्रह्मचारिणी भय हारिणि।
तीसरी चन्द्र घंटा चतुर्थ माता कुष्माण्ड जग तारिणि।
सुर नर मुनि धरते सदा ध्यान हे मातु तुम्हें सत सत प्रणाम।
पंचम स्कन्द माता षष्टि कात्यायिनी माँ कल्याण करे।
माँ कालरात्रि सातवीं तथा अष्टम माँ गौरी ध्यान धरे।
है दिव्य अनूप अनेक रूप शक्तियां मातु सत सत प्रणाम।
है नवम सिद्धि धात्री माता दाता नव निधि रिद्धि सिद्धि महान।
पावन माँ के सब रूप पूज्य पूजता सभी को है जहान।
करती माँ सबके पूर्ण काम हे मातु तुम्हें सत सत प्रणाम।
कोढ़ी को काया देती माँ अंधे को देती कमल नयन।
बाँझिन को सुत कन्या को वर विध्यार्थी को विद्या प्रदान।
निर्भय भक्तों को विमल भक्ति शरणागत पाते परम् धाम।

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