शेरों वाली मैया
लगा हुआ दरबार है भक्तों की भरमार है।
आजा मेरी माता रानी तेरी जय जय कार है।
शेरों वाली मैया , भैया रूप की निराली है।
मुंडो की माला पहने माँ काली खप्पर वाली है।
भक्तों की पुकार है सच्चा ये दरबार हैं।
ज्ञानी ध्यानी कोई न पावै माता तेरा पार है।
तू ही दुर्गा तू ही चन्द्रिका तेरा रूप विशाल है।
तू ही शारदा तू ही भवानी लक्ष्मी तू प्रतिपल है।
महिमा अपरम्पार है सजा हुआ दरबार है।
शुंभ निशुंभ दैत्य महिसाषुर का करती संहार है।
रक्तबीज आदिक सुर मारे किया मातु सुर काज है।
तीनों लोकों में माँ तेरा अटल चल रहा राज है।
अदभुत बना सिंगार सबसे करती प्यार है।
जो भी तेरी शरण में आवै निर्भय बेड़ा पर है।

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