Thursday, 17 November 2016

PARVATI जय जय जननी गणेश की



 
         जय जय जननी गणेश की

जय जय जय जननी गणेश की प्रतिमा परमेश्वर परेश की. 
जय महेश मुख चन्द्र चन्द्रिका जय-- जय जय जय मातु अम्बिका।

भर दे माँ वरदान दायिनी कृपा मिले गोकुलेश की। 
सविनय प्रणव मेरी माता,, पायें प्रियतम अभितम दाता। 

श्री हरि भगति सुगति फलदाता विपदा हरू संसृति कलेश की। 
परम् सुखद वह बेला आये प्रभु की शरण  जाये। 

सर्व सुमंगल समय सुहाये  परम् धाम के शुभ।  
घिरा हुआ हूँ कर्म में भृमित हो गया कली कुचल में। 

निर्भय करू विकराल काल से अतिशय प्रिय पत्नी महेश की।


No comments:

Post a Comment