Wednesday, 16 November 2016

हरि को भजे कर्म हो।। hari ko bhaje karm ho !!!!


 

       हरि को भजे कर्म हो


चाहे हार  हो या जीत  तेरे चरण कमल में प्रीति हो।

चाहे सुबह हो या शाम हो मेरी जीह पे तेरा नाम हो।

तेरी याद हो तेरा ध्यान हो मुझसे तेरा गुणगान हो। 

हम रहें सदा समत्व में सम्मान हो या अपमान हो.

तेरा दर्श हो स्पर्श हो तेरी लेल लीला का मन में हर्ष हो.

हेनाथ हम तुम्हें भूले नहीं कोई दिन या माह या वर्ष हो। 

सदधर्म हो सत्कर्म हो विवेक बुद्धि में मर्म हो

"निर्भय रहीं निश्चय करें हरि को भजे कर्म हो,

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