शिव भजन
मंगलम भगवान शंभो मंगलम वृषभ ध्वजं।
मंगलम पार्वती पतये मंगलाय तनो हरः।
दरबार में भोले शंकर के दुःख दर्द स्वयं मिट जाते है।
तन मन से शिव की महिमा का गुणगान भक्त जब गाते है।
शिव चालीसा स्त्रोत मंत्र यह सहस नाम जप करते जो।
करते पञ्चाक्षर मंत्र पाठ मन वांछित फल वो पाते है।
महा मृत्युंजय मंत्रों से जप यज्ञ हवन करवाते है।
उनके दारुण दुःख मिट जाते वह संसृति क्लेश पाते हैं।
जो बेल पत्र फल फूल अछत गंगा जल आन चढ़ाते है।
धन धान्य परम सुख व वैभव अवढर दानी से है।
तन मन धन से शिव चरणों में जो ध्यान लगाते आरतजन।
'निर्भय ' हो जाते भवभय से सायुज्य मुक्ति वो पाते है।

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