शंकर स्तुति 
नमामि शंकर नमामि शंकर नमामि शंकर नमामि शंकर
अति दयालु भोले भण्डारी अगजग सबके मंगल कारी।
सती पार्वती के प्राणेश्वर नमामि।
जन हिट घोर हलाहल पीकर बने सदाशिव नीलकंठ बर।
शुर असुरन शुचि बरद शुभांकर नमामि।
अति दयालु भोले भण्डारी अगजग सबके मंगल कारी।
सती पार्वती के प्राणेश्वर नमामि।
जन हिट घोर हलाहल पीकर बने सदाशिव नीलकंठ बर।
शुर असुरन शुचि बरद शुभांकर नमामि।
भक्तन के सब कष्ट निवारे दे निजभक्ति शक्ति संचार।
मारे शंख चूड़ जालंधर नमामि।
तुम्ही हो चौदह भुवन में व्यापक त्रिलोक के दुःख दरिद्र नाशक।
प्रतिपालक कारक प्रलयंकर नमामि।
काटत संसृति क्लेश भयंकर "नमः शिवाय मंत्र " पञ्चाक्षर।
देति मुदित हुई अति दुर्लभ बार नमामि।
अंग भुजंग गंग सर सोहे चन्द्र मुकुट त्रैलोचन मोहे।
आशुतोष तुम दानी अवढर नमामि।
कृपा करो हे पार्वती पति 'निर्भय' करदो मेटो संसृति।
विनय सुनो मेरी रामेश्वर, नमामि शंकर स्तुति।
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