हे हनुमान गुसाई दया करु।
हे हनुमान गुसाई दया करु।
बुद्धि हिन बलहीन दिन अति अत्याधिक अधमाई दया करू।
ज्ञान विराग भक्ति कछु नाहीं शक्ति क्षीण बृद्धाई।
काम क्रोध मद मोह महाभट त्रसित करै बरिआई दया करु।
त्रसित टप त्रय ग्रसित रोग भव भ्रमित भरमु नहीं जाई।
भक्ति मुष्टिका ज्ञान गदा से मारू असुर नाई दया करु।
सत शिरोमणि रामभक्ति मणि करू प्रकाश टीम जाई।
निर्भय करहु हरहु मम संकट संकट मोचन आई दया करु।

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