दिव्य हमारा डेरा है।
हे हनुमान! ले बात मन यह दिव्य हमारा डेरा है।जाना है बड़ी दूर बतोहू कर ले रैन बसेरा है।
मेघनाद ने शक्ति मर दी तेरा राम दुखारी है
लक्ष्मण मूर्छित पड़ी जमी पर कपि सेना सब हारी है
वैद्य ने बूटी लेने भेजा खा न होई सबेरा है।
जाना है बड़ी दूर बतोहू कर ले रैन बसेरा है।
यह भगवान की आज्ञा है तू आज यहां विश्राम करें।
तू क्यों चिंता करता है जो करना है सो राम करे।
राम लखन के जीवन में नहि होना कभी अंधेरा है।
जाना है बड़ी दूर बतोहू कर ले रैन बसेरा है।
तुझको भूख प्यास न लागे ऐसा मंत्र बता दूँगा।
जिस पर्वत पर मिले औषधी तुझको वहाँ पहुचा दूँगा।
कालनेमि कपटी साधु ने कहा बना लू लूँ चेरा है।
जाना है बड़ी दूर बतोहू कर ले रैन बसेरा है।
हनुमान जब जल माँगा दिया सरोवर दिखलाई।
जैसे पैर पड़ा जल में थी मगरी व्याकुल अकुलाई।
आँख खुली मगरी ने देखा बदल गया तन मेरा है।
जाना है बड़ी दूर बतोहू कर ले रैन बसेरा है।
पाकर के स्पर्श भक्त का मगरी बनी अप्सरा है।
साधु नहि यह कालनेमि है सम्भव इससे खतरा है।
हनुमान आकर तब बोले सुन लो कहना मेरा है।
जाना है बड़ी दूर बतोहू कर ले रैन बसेरा है।
मंत्र बाद में लूँगा पहले दूँ दक्षिणा तुम्हें गुरुवर।
पूँछ लपेट पटक के स्वर्ग सिधार गया निसिचर
पथ का रोड़ा तोड़ा हनुमत निर्भय चलें अँधेरा हैं।
जाना है बड़ी दूर बतोहू कर ले रैन बसेरा है।

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