Thursday, 24 November 2016

तुम्हारी प्राण प्रिय सीता बहुत बेहाल कह देना

 
तुम्हारी प्राण प्रिय सीता बहुत बेहाल कह देना



श्री रघुबीर से महाबीर मेरा हल कह देना।
तुम्हारी प्राण प्रिय सीता बहुत बेहाल कह देना।
तात कहना मेरा परनाम चरणों में विनय भारी।
दया करना विरद उनका मैं हूँ अति दिन दुखयारी।
क्षमा क्र दे लखन मेरे बच्चन वो लाल कह देना।
न दिनको चैन रातों को ही नयनन नींद  आती हैं।
यहाँ की दैत्य बालायें मुझे बेजा सताती हैं।
है त्रिजटा एक जो मेरा पूछतीं हाल कह देना।
दिखता दुष्ट रावण हैं  हमें तलवार की धमकी।
कहाँ तक चुप रहूँ सहहुँ डाटती ओट तृन की।
मेरे रघुनाथ रावण के कलम दश भाल कर  देना।
श्री रघुबीर से महाबीर मेरा हल कह देना।
अगर एक माह के अंदर जो करुणा निधि नहीं आये।
तो पायेगे नहीं सीता को जीवित देती बतलाये।
है निश्चित कल रावण का या मेरा लाल कह देना।
श्री रघुबीर से महाबीर मेरा हल कह देना।
जिस तरह जिव बिनयेत्न नदी बिन बारि  के जैसे।
तात यह बात कह देना पुरुष बिन नारी है तैसे।
कहूँ अब और क्या तुमसे मेरा बस हल कह देना।
खो हनुमान रखूं प्रान कैसे तुम भी हो जाते।
पड़ी थी ठंड कुछ दिल में मुझे फिर दिन वही रातें।
करे इस भय से निर्भय अब अंजनी लाल कह देना।
श्री रघुबीर से महाबीर मेरा हल कह देना।

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