जय बोलो हनुमान की।
जय बोलो हनुमान की।
ऐसी शक्ति न भक्ति किसी में जैसी है हनुमान की।
तड़प रहे थे प्यास मरे भालू बंदर सेनानी।
विंबा पैठि कपि खोज निकाले सब को पिला दिया पानी।
मूंदी आँखे सिंधु तट ठाढ़े स्वयं प्रभा वरदान के।
बिरह विथ में व्याकुल थी जब लंका में माता सीता।
राम राम रटती निसिवासर संकट में जीवन बीती।
लंका जाकर दई मुंद्रिका कथा कहि भगवान की।
शक्ति लगी लक्ष्मण को रण में लाये तब रामदल को।
वैद्य सुखेन सहित गृह औषधि संजीवनी लाये में।
हर्षित हुये राम रक्षा ई लक्ष्मण जी के प्राण की।
राम वियोग विरह में व्याकुल भरत नयन जलभर आये।
अवध आ रहे राम लखन सिय समाचार शुभ बतलाये।
निर्भय भरत मगन उठि धाये जय जय कृपानिधान की।

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