Friday, 11 November 2016

नयन विशाल भृकुटि छवि मंगल


मंगला चरण 
सचिदानन्द  रुपाये विश्वोत्यादि हेतवे। 
तापत्रय विनाशक श्रीकृष्णाय वय नुमः। 

श्याम स्वरूप रचित अति मंगल, शोभा ललित दिव्य मुख मण्डल। 
नयन विशाल भृकुटि छवि मंगल, चितवनि चपल चोर चित मंगल। 
मंगल जनम  कर्म शुभ मंगल,  मंगल वेणु अधर धर मंगल। 
मंगल बदन कमल कर मंगल, मंगल द्रव्य पूज्य विधि मंगल।
मंगल मुकुट श्रवण में कुण्डल, पीताम्बर बनमाला मंगल।
मंगल गावत चरित सुमंगल, मंगल चरण कमल वन्दित वर मंगल।
मंगल वेणी माधव मंगल,   ब्रज  मण्डल  में   घर - घर मंगल।
मंगल जन रंजन गंजन खल,   लीला - ललित  ग्वाल दल मंगल।
गोपी मंगल राधा मंगल,    नंद यशोदा  लाला  मंगल।
"भगवत भजन" पुस्तिका  मंगल, श्रोता वक्ता ज्ञाता मंगल। 
"निर्भय " श्रीकृष्ण पद  मंगल, नित नव मंगल, मंगल, मंगल।  

                         =========ॐ =======

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