सरस्वती वंदना
सरस्वती का ध्यान ह्रदय धरि प्रथम गजानन विनय उचारी।श्री गुरु चरण सरोज समर्पित सादर रचना रुचिर हमारी।
भजन कीर्तन सेवा सुमिरन चेतवानी विविध विस्तारी।
मैं कवि नहीं विवेक ज्ञान नहिं, कुछ कवियों की नकल उतारी।
हरि गुण ग्राम नाम श्री हरि को, निज मति भनित विवेक विचारी।
क्षमा करेंगें हमें विज्ञजन, त्रुटियों को ले स्वयं सुधारी।
आध्यत्मिक कवियों की कृति प्रति संवेदना विशेष संभारी।
तुलसी मीरा सूर कबीरा आदि संत पद विनय हमारी।
पढ़ने सुनने और समझने में अति सरल सहज रुचिकारी।
श्रद्धा भक्ति सहित जो गावै भगति सहज पावै फलचारी।
भवभय हारी मंगल कारी काव्य परम प्रिय श्री हरि प्यारी।
"भगवत भजन " मगन मन गावत 'निर्भय' भवनिधि देई उतारी।

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