विष्णु स्तुति
नारायणं हृषीकेशं गोविंदं गरुणध्वजमं।
वासुदेवं हरि कृष्णम केशवं प्रणमाम्यहं।।
श्री गणपति गुरु शारदा ब्रह्मा विष्णु महेश।
परं ब्रह्म के सगुण वपु राम कृष्ण देवेश।
श्रुति कीरति पति शत्रुहन भरत माण्डवी नाथ।
वंदौ चारौ युगल पद जोरि पानि धरि शीश।
श्री मद भगवद भजन कृति प्रति दीजै आशीष।
हे त्रिभुवन पति ! हे राधापति ! मायापति भगवन।
हे अनाथ के नाथ कृपालु दाता दया निधान।
हे केशव !हे करुणा सागर !कोमल चित अति सुहृदय सुजान।
करूणाकर निर्भय चरणामृत की करिये एक बूंद प्रदान।
श्री मद "भगवद भजन " ते भवनिधि पावै पार।
भगवन्तन प्रबल पावक ते पाप होहि जरि छार। ।

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