वंदना पद पंकज सत बार
परम पूज्य गुरदेव दयानिधि सुनिये करुण पुकार।
वंदना पद पंकज सत बार।
हुआ निरास उदास जगत से लोगो से विश्वास हटा।
जिनके लिये खो दिया जीवन दिया उन्होंने मुझे मिटा।
पाकर शुभ आशीष तुम्हारा उतर गया सर से भ्रम भार।
वंदना पद पंकज सत बार।
ब्रह्मा विष्णु महेश रूप तुम्ह जगद गुरु मेरे गुरुदेव।
श्री हरि भगति विमल बर दे करो कृतार्थ हमें गुरुदेव।
द्वार दया को खोलो भगवन दीजै ज्ञान विवेक विचार।
वंदना पद पंकज सत बार।
अब तो नही दीखता कोई तेरे शिवा हमारा और।
जैसे जल जहाज का पंक्षी पता नही दूसरा ठौर।
सर्व समर्पण गुरु चरणों में "निर्भय" कर दो भवभय पार।
वंदना पद पंकज सत बार।

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